Back
मंत्र

परब्रह्म

ॐ — प्रणव

ॐ तीन लोक, तीन काल और तीन गुणों का मूल नाद है। यह मौन से पहले की ध्वनि है।

ॐ — प्रणव

Rounds complete: 0

Tap one bead per repetition. Sound and haptic feedback may depend on your browser and device settings.

अर्थ

ॐ तीन लोक, तीन काल और तीन गुणों का मूल नाद है। यह मौन से पहले की ध्वनि है।

साधना-भाव

चित्त एकाग्र होता है, श्वास गहरी होती है, जप का द्वार खुलता है।

विधि

पीठ सीधी रखें। श्वास भरते हुए मौन रहें, छोड़ते हुए धीरे से ॐ का उच्चारण करें। तीन मात्रा — अ, उ, म — फिर मौन।