गोस्वामी तुलसीदास उत्तर भारत की रामभक्ति परंपरा के प्रमुख कवि-संत माने जाते हैं। उनके जीवन-वृत्त में इतिहास और जनश्रुतियाँ साथ-साथ मिलती हैं, इसलिए अनेक घटनाओं के विवरण अलग हो सकते हैं।
उनका सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ रामचरितमानस है, जिसमें रामकथा को अवधी में प्रस्तुत किया गया। लोकभाषा के कारण यह पाठ घरों, मंदिरों और सामूहिक कथाओं तक व्यापक रूप से पहुँचा।
तुलसीदास की रचनाओं में राम-नाम, मर्यादा, सेवा, दया और भक्त-भगवान संबंध की विविध अभिव्यक्तियाँ मिलती हैं। हनुमान चालीसा भी परंपरागत रूप से उनसे संबद्ध मानी जाती है।
उनकी विरासत बताती है कि गहरी आध्यात्मिक सामग्री सरल भाषा में भी गरिमापूर्ण रह सकती है—यही विचार आधुनिक डिजिटल भक्ति के लिए भी महत्त्वपूर्ण है।