Back
Festival guide

मंगलवार, 10 नवंबर 2026

गोवर्धन पूजा

Govardhan Puja

श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन धारण की स्मृति—प्रकृति, गौ-सेवा, अन्नकूट, समुदाय और विनम्रता का पर्व।

रंगोली, तोरण और दीपों की festival illustration

तिथि और मुहूर्त शहर, सूर्योदय और परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं। प्रकाशित समय को अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर से मिलाएँ।

महत्व और भाव

गोवर्धन पूजा क्यों मनाया जाता है?

गोवर्धन पूजा का भाव है कि प्रकृति, पशु, पर्वत, जल और अन्न हमारी जीवन-व्यवस्था के आधार हैं। अहंकार से अधिक कृतज्ञता और संरक्षण को महत्व दिया जाए।

प्रमुख कथाएँ और परंपराएँ

अलग क्षेत्रों और सम्प्रदायों में कथाओं का क्रम या विवरण भिन्न हो सकता है। नीचे प्रचलित परंपराओं का सरल परिचय है।

1

गोवर्धन धारण

भागवत परंपरा में कृष्ण ब्रजवासियों को इंद्र के स्थान पर गोवर्धन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने को कहते हैं। क्रोधित इंद्र की वर्षा से रक्षा के लिए कृष्ण गोवर्धन पर्वत उठाते हैं।

2

अन्नकूट

अनेक प्रकार के भोजन का पर्वताकार भोग समुदाय की साझी समृद्धि और अन्न के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

गोवर्धन पूजा कैसे मनाया जाता है?

1

घर या मंदिर में छोटा गोवर्धन प्रतीक बनाएं—मिट्टी या पर्यावरण-सुरक्षित सामग्री से।

2

अन्नकूट में क्षमता अनुसार सात्त्विक व्यंजन अर्पित करें; भोजन व्यर्थ न करें।

3

गौशाला या पशु-कल्याण संस्था की जिम्मेदार सहायता करें।

4

प्रकृति-संरक्षण का एक वास्तविक संकल्प लें।

सरल पूजा विधि

परिवार और सम्प्रदाय की परंपरा को प्राथमिकता दें। यह घर पर की जा सकने वाली सरल मार्गदर्शिका है।

1

गोवर्धन प्रतीक

स्वच्छ स्थान पर छोटा प्रतीक बनाकर पुष्प से सजाएँ।

2

कृष्ण स्मरण

कृष्ण नाम और गोवर्धन लीला का स्मरण करें।

3

अन्नकूट

सात्त्विक भोजन अर्पित करें और बाद में प्रसाद रूप में सम्मान से बाँटें।

4

परिक्रमा-भाव

स्थान संभव न हो तो घर में प्रतीक की परिक्रमा करते हुए प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन ही होती है?

सामान्यतः प्रतिपदा को होती है, लेकिन तिथि-क्षय या वृद्धि से स्थानीय तारीख बदल सकती है।

अन्नकूट में कितने व्यंजन जरूरी हैं?

कोई निश्चित संख्या आवश्यक नहीं। एक सरल सात्त्विक भोग भी पर्याप्त है; भोजन व्यर्थ न करें।

संदर्भ

यह लेख सामान्य भक्तिपरक मार्गदर्शन के लिए है। स्थानीय परंपरा, मंदिर और परिवार की विधि अलग हो सकती है।

Last reviewed: 2026-08-29

Continue exploring

आगे क्या देखें या पढ़ें?

इसी विषय, आराध्य और भक्ति-रुचि से जुड़ी अगली सामग्री सीधे यहाँ से खोलें।