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शनिवार, 19 सितंबर 2026

राधाष्टमी

Radha Ashtami

श्रीराधा रानी के प्राकट्य का ब्रज-उत्सव—राधा-नाम, कीर्तन, अभिषेक और निष्काम प्रेम-भक्ति का स्मरण।

राधाष्टमी के लिए श्री राधावल्लभलाल जी का दर्शन

तिथि और मुहूर्त शहर, सूर्योदय और परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं। प्रकाशित समय को अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर से मिलाएँ।

महत्व और भाव

राधाष्टमी क्यों मनाया जाता है?

राधाष्टमी भक्ति में प्रेम, करुणा, सेवा और अहंकार-विसर्जन का उत्सव है। बरसाना, वृंदावन और राधा-वल्लभ परंपराओं में विधि तथा समय अलग हो सकते हैं।

प्रमुख कथाएँ और परंपराएँ

अलग क्षेत्रों और सम्प्रदायों में कथाओं का क्रम या विवरण भिन्न हो सकता है। नीचे प्रचलित परंपराओं का सरल परिचय है।

1

वृषभानु-कुमारी का प्राकट्य

ब्रज की लोकप्रिय परंपरा में श्रीराधा को वृषभानु और कीर्ति की पुत्री माना जाता है। उनके प्राकट्य को दिव्य प्रेम और कृष्ण-भक्ति की पूर्णता से जोड़ा जाता है।

2

राधा-भाव

भक्ति-परंपराओं में राधा का भाव स्वयं को केंद्र से हटाकर प्रियतम ईश्वर की सेवा और प्रसन्नता को केंद्र बनाने की प्रेरणा देता है।

राधाष्टमी कैसे मनाया जाता है?

1

राधा-नाम जप और ब्रज पदों का पाठ करें।

2

स्थानीय मंदिर में अभिषेक या श्रृंगार-दर्शन की परंपरा देखें।

3

राधा-कृष्ण को पुष्प, फल और सात्त्विक भोग अर्पित करें।

4

श्रीहित चौरासी का एक या अधिक पद अर्थ सहित पढ़ें।

सरल पूजा विधि

परिवार और सम्प्रदाय की परंपरा को प्राथमिकता दें। यह घर पर की जा सकने वाली सरल मार्गदर्शिका है।

1

राधा-नाम

मन को शांत कर ‘राधा राधा’ का जप करें।

2

पुष्प और भोग

राधा-कृष्ण को पुष्प तथा फल अर्पित करें।

3

पद-पाठ

श्रीहित चौरासी या राधा-माधुर्य से जुड़ा पद पढ़ें।

4

सेवा-भाव

किसी व्यक्ति की सहायता बिना प्रशंसा की अपेक्षा के करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राधाष्टमी किसका उत्सव है?

यह श्रीराधा रानी के प्राकट्य और प्रेम-भक्ति के भाव का उत्सव है।

क्या राधाष्टमी पर उपवास आवश्यक है?

परंपरा अनुसार उपवास रखा जाता है, पर स्वास्थ्य और गुरु/परिवार की परंपरा को प्राथमिकता दें।

संदर्भ

यह लेख सामान्य भक्तिपरक मार्गदर्शन के लिए है। स्थानीय परंपरा, मंदिर और परिवार की विधि अलग हो सकती है।

Last reviewed: 2026-08-29

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