संकल्प का सरल अर्थ है—अपने मन में पूजा का उद्देश्य स्पष्ट करना। यह किसी कठिन संस्कृत वाक्य के बिना भी किया जा सकता है।
आप शांत होकर कह सकते हैं: ‘मैं श्रद्धा, कृतज्ञता और सबके कल्याण के भाव से यह पूजा कर रहा/रही हूँ।’ इससे मन बाहरी व्यस्तता से हटकर साधना में प्रवेश करता है।