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Festival guide

बुधवार, 14 जनवरी 2026

मकर संक्रांति

Makar Sankranti

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश, उत्तरायण, नई फसल, दान और कृतज्ञता से जुड़ा पर्व। भारत के अलग-अलग भागों में इसे पोंगल, उत्तरायण, माघ बिहू और खिचड़ी जैसे नामों से मनाया जाता है।

रंगोली, तोरण और दीपों की festival illustration

तिथि और मुहूर्त शहर, सूर्योदय और परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं। प्रकाशित समय को अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर से मिलाएँ।

महत्व और भाव

मकर संक्रांति क्यों मनाया जाता है?

मकर संक्रांति ऋतु-परिवर्तन, सूर्य के प्रति कृतज्ञता और परिश्रम से मिली फसल को साझा करने का उत्सव है। तिल और गुड़ का प्रयोग सर्दी के मौसम तथा मधुर व्यवहार—दोनों का प्रतीक माना जाता है।

प्रमुख कथाएँ और परंपराएँ

अलग क्षेत्रों और सम्प्रदायों में कथाओं का क्रम या विवरण भिन्न हो सकता है। नीचे प्रचलित परंपराओं का सरल परिचय है।

1

सूर्य और शनि से जुड़ी परंपरा

लोकप्रिय मान्यता में सूर्यदेव अपने पुत्र शनि से मिलने मकर राशि में आते हैं। इस कथा को मतभेद दूर करने, संबंध सुधारने और विनम्रता अपनाने के संदेश के रूप में समझा जाता है।

2

भीष्म और उत्तरायण

महाभारत की परंपरा में भीष्म पितामह ने उत्तरायण काल की प्रतीक्षा की। इसलिए यह समय प्रकाश, संकल्प और आध्यात्मिक उन्नति से जोड़ा जाता है।

मकर संक्रांति कैसे मनाया जाता है?

1

प्रातः स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित करें।

2

तिल, गुड़, खिचड़ी, अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।

3

परिवार के साथ मौसमी भोजन साझा करें और प्रकृति तथा किसानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।

4

पतंग उड़ाते समय छत, बिजली के तार, पक्षियों और सुरक्षित मांझे का विशेष ध्यान रखें।

सरल पूजा विधि

परिवार और सम्प्रदाय की परंपरा को प्राथमिकता दें। यह घर पर की जा सकने वाली सरल मार्गदर्शिका है।

1

संकल्प

शांत मन से सूर्य, प्रकृति और अन्न के प्रति कृतज्ञता का संकल्प लें।

2

सूर्य अर्घ्य

सूर्योदय के समय जल अर्पित करें और आंखों को सीधे तेज सूर्य पर टिकाए बिना प्रणाम करें।

3

नाम-स्मरण

11 या 21 बार ‘ॐ सूर्याय नमः’ जपें।

4

नैवेद्य और दान

तिल-गुड़ अर्पित कर प्रसाद बाँटें और यथाशक्ति दान करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मकर संक्रांति हर वर्ष लगभग एक ही तारीख को क्यों आती है?

यह सौर गणना से जुड़ी है, इसलिए सामान्यतः 14 या 15 जनवरी के आसपास आती है।

क्या केवल तिल-गुड़ ही दान करना चाहिए?

नहीं। अन्न, कंबल, वस्त्र, पुस्तक या जरूरतमंद की उपयोगी सहायता भी की जा सकती है।

संदर्भ

यह लेख सामान्य भक्तिपरक मार्गदर्शन के लिए है। स्थानीय परंपरा, मंदिर और परिवार की विधि अलग हो सकती है।

Last reviewed: 2026-08-29

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